आजमगढ़। अखिल भारत प्रगतिशील छात्र मंच (एआईपीएसएफ) आजमगढ़ की ओर से रविवार को करतालपुर बाईपास के पास सराय मंदराज स्थित सावरकर शिशु निकेतन स्कूल में “भगत सिंह के विचारों की वर्तमान संघर्षों में अहमियत” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत जितेंद्र कुमार नूर की शिक्षा और युवाओं से जुड़ी कविताओं व गजलों से हुई। इस दौरान ‘इंकलाब जिंदाबाद’, ‘सबको मुफ्त शिक्षा, सबको स्थायी काम’ और ‘पूंजीवाद-साम्राज्यवाद मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए गए।
गोष्ठी में राहुल ने कहा कि समाज के वर्गीय विभाजन का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। गरीब और अमीर वर्ग के लिए अलग-अलग शिक्षा मॉडल विकसित किए गए। उन्होंने भगत सिंह के उस विचार का उल्लेख किया, जिसमें विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ देश की परिस्थितियों को समझने और उनके सुधार के उपायों पर विचार करने की आवश्यकता बताई गई है।
रामाश्रय यादव ने कहा कि 1991-92 की आर्थिक नीतियों के बाद शिक्षा व्यवस्था में निजीकरण और बाजार का प्रभाव बढ़ा है, जिससे शिक्षा आम लोगों के लिए महंगी होती जा रही है। सूबेदार यादव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और सरकारी स्कूलों के बंद होने या विलय को लेकर चिंता जताई।
दुखहरन ने शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के रिक्त पदों के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। अखिलेश ने NEET, JEE और CUET जैसी प्रवेश परीक्षाओं तथा भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए।
वक्ताओं ने बेरोजगारी, महंगाई, निजीकरण, ठेकाप्रथा और शिक्षा-स्वास्थ्य के बढ़ते खर्च को लेकर भी चिंता जताई। चंदन कुमार ने कहा कि भगत सिंह को केवल स्मरण करने के बजाय उनके विचारों को समझकर वर्तमान संघर्षों से जोड़ने की जरूरत है।
सत्यदेव पाल ने कहा कि छात्रों, नौजवानों, मजदूरों और किसानों में आर्थिक-सामाजिक असमानता, बेरोजगारी और महंगाई के खिलाफ गुस्सा है। इसे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है। स्कूल प्रबंधक राजमणि यादव ने छात्रों से पढ़ाई के साथ सामाजिक मुद्दों को समझने और संघर्ष करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में केदारनाथ वर्मा, ओमप्रकाश सिंह, प्रशांत, रवि, हरिनारायण, जितेंद्र कुमार नूर, चंदन कुमार, सूबेदार यादव, रामाश्रय यादव, अनमोल, अखिलेश समेत दर्जनों लोग मौजूद रहे। अंत में प्रशांत ने धन्यवाद ज्ञापित किया।


