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See: LLM students again reached Lucknow to seek justice from the Governor, made serious allegations again...
शिक्षा

राज्यपाल से न्याय की गुहार लगाने फिर लखनऊ पहुंचे एलएलएम छात्र, कुलपति व शिक्षिका पर लगाए गंभीर आरोप

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| 📅 03 Aug 2026, 07:28 PM | 👁️ 32 | 📍 उत्तर प्रदेश
लखनऊ। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के विधि विभाग के एलएलएम अंतिम वर्ष के छात्र पवन कुमार एक बार फिर न्याय की गुहार लेकर लखनऊ पहुंचे। पवन कुमार का कहना है कि कुछ दिन पहले भी उन्होंने लखनऊ आकर मीडिया से बातचीत की थी और अपनी समस्याओं को सार्वजनिक किया था। उनका दावा है कि समाचार प्रसारित होने के बावजूद अब तक उन्हें डिग्री जारी नहीं की गई। उन्होंने बताया कि सोमवार को वे दोबारा लखनऊ पहुंचे और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल से मुलाकात का प्रयास किया, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति तथा विधि विभाग की प्रोफेसर डॉ. कामिनी विश्वकर्मा पर गंभीर आरोप लगाए।पवन कुमार ने आरोप लगाया कि विभाग की शिक्षिका द्वारा उनके साथ जातिगत उत्पीड़न, मानसिक उत्पीड़न और अभद्र व्यवहार किया गया। उनका यह भी दावा है कि उन्हें आंतरिक परीक्षा में जानबूझकर केवल 6 अंक दिए गए, जिससे उनके शैक्षणिक भविष्य को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।पवन कुमार के अनुसार, एलएलएम अंतिम वर्ष प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने के बावजूद विश्वविद्यालय ने उनका परिणाम "RD Disciplinary Enquiry" दर्शाते हुए उनकी डिग्री जारी नहीं की है। उनका कहना है कि इसके कारण वे उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं तथा रोजगार के अवसरों से वंचित हो रहे हैं।मीडिया से बातचीत में पवन कुमार ने दावा किया कि उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला और न ही मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। उन्होंने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए, ताकि वे अपने पास उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर सकें।पवन कुमार ने बताया कि उन्होंने अपने प्रार्थना पत्र के साथ अंकपत्र, परीक्षा परिणाम, पूर्व में की गई शिकायतों तथा अन्य संबंधित दस्तावेज भी संलग्न किए हैं। स्पष्टीकरण: यह प्रेस विज्ञप्ति पवन कुमार द्वारा लगाए गए आरोपों, राज्यपाल को भेजे गए प्रार्थना पत्र तथा मीडिया में दिए गए बयानों पर आधारित है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, उसके कुलपति तथा प्रोफेसर डॉ. कामिनी विश्वकर्मा का पक्ष प्राप्त होना शेष है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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