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आजमगढ़: सगड़ी के सोनोरा में बच्चों की जान से खिलवाड़, 10 से 15 साल के नाबालिग चला रहे हैं नाव, प्रशासन मौन

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| | 👁️ 12 | 📍 सगड़ी
आजमगढ़। उत्तर प्रदेश सरकार भले ही बाढ़ से निपटने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत आजमगढ़ की सगड़ी तहसील में कुछ और ही बयां कर रही है। सगड़ी तहसील के उत्तरी छोर पर बहने वाली मोक्षदायिनी सरयू नदी का जलस्तर इन दिनों धीरे-धीरे बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने से सगड़ी के आखिरी गांव सोनोरा ग्राम सभा में हालात बद से बदतर हो गए हैं। यहां बांध से महज 100 मीटर की दूरी पर सरयू की एक छोटी शाखा ने ग्रामीणों की मुसीबत बढ़ा दी है। इस शाखा को पार करने के लिए कोई पुल, पीपा पुल या सरकारी व्यवस्था नहीं है। आलम यह है कि आम जनमानस से लेकर स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को अपनी दैनिक दिनचर्या पूरी करने के लिए पूरी तरह से नाव पर निर्भर रहना पड़ रहा है। 
  10 से 15 साल के बच्चे बन गए नाविक
सबसे दर्दनाक और चिंताजनक तस्वीर स्कूली बच्चों की है। सोनोरा से सटे गांवों के नन्हे-मुन्ने बच्चे जिनकी उम्र महज 10 से 15 साल है, वह रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर नाव के सहारे स्कूल जा रहे हैं। मौके पर देखा गया कि चिलचिलाती धूप में दर्जनों बच्चे नदी किनारे नाव का इंतजार कर रहे थे। काफी देर तक नाविक का कोई पता नहीं चला। इसके बाद जो दृश्य दिखा वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था। 10-15 साल के नाबालिग बच्चे खुद ही नाव खेते हुए एक किनारे से दूसरे किनारे जा रहे थे। न उनके पास लाइफ जैकेट थी, न ही कोई सुरक्षा इंतजाम। जरा सी चूक हुई तो बड़ा हादसा तय है। 
  प्रशासन का गैर-जिम्मेदाराना रवैया
इस गंभीर मामले में जब क्षेत्रीय लेखपाल रितेश यादव से बात की गई तो उन्होंने बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब दिया। उन्होंने कहा कि "हम 24 घंटे वहां नहीं देख सकते हैं, अगर कोई बताएगा तभी हमको पता चलेगा। हम इस समय व्यस्त हैं, हमें सरकार द्वारा बाढ़ राहत सामग्री वितरण के लिए लगाया गया है।" वहीं इस संबंध में जब सगड़ी के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल लगातार नॉट रिचेबल बता रहा था। इससे साफ जाहिर होता है कि प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर कितना गंभीर है।

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