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See: Due to MLA's initiative, mortal remains reached home in four days
राजनीति

विधायक की पहल से चार दिन में स्वदेश पहुंचा पार्थिव शरीर

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| | 👁️ 12 | 📍 Azamgarh
आजमगढ़ । रोजी-रोटी की तलाश में कतर गए 44 वर्षीय व्यक्ति की अचानक हार्ट अटैक से मौत की खबर ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। विदेश की धरती पर हुई मौत के बाद परिजनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने की थी। ऐसे मुश्किल समय में गोपालपुर विधायक नफीस अहमद की पहल से चार दिन बाद पार्थिव शरीर वाराणसी पहुंच सका, जिसके बाद परिजन उसे लेकर गांव पहुंचे और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में जुट गए। महाराजगंज कोतवाली क्षेत्र के सैदपुर गांव निवासी जितेंद्र यादव (44) पुत्र स्वर्गीय राम तिलक यादव कतर में रहकर ड्राइवर का कार्य करते थे। इसी रोजगार से वह अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। परिजनों के अनुसार, 31 अगस्त 2026 की रात कंपनी की ओर से सूचना दी गई कि जितेंद्र यादव की हार्ट अटैक से मौत हो गई है। अचानक मिली इस खबर से परिवार में चीख-पुकार मच गई। पत्नी, बच्चों और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। विदेश में हुई मौत के बाद परिवार के सामने पार्थिव शरीर को भारत लाने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई। परिजन इस सदमे में थे कि अब क्या किया जाए और किस तरह अपने अपनों के शव को घर वापस लाया जाए। इसी दौरान परिवार के लोगों ने गोपालपुर विधायक नफीस अहमद से संपर्क कर पूरी घटना की जानकारी दी और मदद की गुहार लगाई। परिजनों के मुताबिक, विधायक ने उन्हें भरोसा दिलाया कि पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने परिवार को जल्द पार्थिव शरीर घर पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके बाद आवश्यक स्तर पर प्रयास शुरू किए गए। विधायक की पहल के बाद 4 सितंबर को जितेंद्र यादव का पार्थिव शरीर वाराणसी स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचा। एयरपोर्ट से परिजन पार्थिव शरीर को लेकर सैदपुर गांव पहुंचे। जैसे ही पार्थिव शरीर घर पहुंचा, परिवार में एक बार फिर मातम छा गया। अंतिम दर्शन के लिए जुटे परिजनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। जितेंद्र यादव अपने पीछे दो पुत्र और दो पुत्रियों का परिवार छोड़ गए हैं। एक पुत्री की शादी हो चुकी है, जबकि बड़ा पुत्र अभी पढ़ाई कर रहा है। परिवार के लिए जितेंद्र ही रोजी-रोटी का प्रमुख सहारा थे। उनकी अचानक मौत से परिवार के सामने भावनात्मक संकट के साथ-साथ भविष्य की चिंता भी खड़ी हो गई है। परिजनों ने इस मुश्किल घड़ी में मदद के लिए विधायक नफीस अहमद के प्रति आभार जताया। उनका कहना है कि विदेश में हुई मौत के बाद पार्थिव शरीर को भारत लाना उनके लिए बेहद कठिन था। ऐसे समय में विधायक ने पहल की और उनके प्रयास से पार्थिव शरीर घर तक पहुंच सका। परिजनों की आंखों में अपनों को खोने का गम साफ दिखाई दे रहा था। एक तरफ घर में अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी तो दूसरी तरफ परिवार के सदस्य उस व्यक्ति को याद कर बिलख रहे थे, जो परिवार की बेहतर जिंदगी की उम्मीद लेकर हजारों किलोमीटर दूर गया था, लेकिन वापस लौटा तो पार्थिव शरीर के रूप में।

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