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राजनीति

UGC रेगुलेशन पर आर-पार की जंग: पूर्व छात्र नेताओं ने सांसद धर्मेंद्र यादव और 'इंडिया' गठबंधन को घेरा

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| 📅 06 Mar 2026, 04:44 PM | 👁️ 44

आजमगढ़ के सरायमीर में पूर्व छात्र नेताओं ने प्रेस वार्ता कर सांसद धर्मेंद्र यादव और 'इंडिया' गठबंधन से आगामी संसद सत्र में यूजीसी रेगुलेशन लागू करने की मांग उठाने की अपील की। नेताओं ने चेतावनी दी कि श

आजमगढ़ के सरायमीर में पूर्व छात्र नेताओं ने प्रेस वार्ता कर सांसद धर्मेंद्र यादव और 'इंडिया' गठबंधन से आगामी संसद सत्र में यूजीसी रेगुलेशन लागू करने की मांग उठाने की अपील की। नेताओं ने चेतावनी दी कि श

सरायमीर (आजमगढ़) | शैक्षणिक संस्थानों में व्याप्त जातीय भेदभाव के खिलाफ 'यूजीसी रेगुलेशन' को लागू कराने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। आजमगढ़ के सरायमीर स्थित शालीमार रेस्टोरेंट में आयोजित एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता में विभिन्न विश्वविद्यालयों के पूर्व छात्र नेताओं ने हुंकार भरते हुए स्पष्ट किया कि यदि आगामी संसद सत्र में इस मुद्दे पर आवाज नहीं उठाई गई, तो सांसदों का घेराव किया जाएगा। धर्मेंद्र यादव और अखिलेश यादव से सीधे सवाल पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए जामिया मिलिया इस्लामिया के कलीम जमाई, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के राजीव यादव, और बीएचयू के वीरेंद्र यादव ने सीधे तौर पर आजमगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव पर निशाना साधा। नेताओं ने कहा: "आजमगढ़ सामाजिक न्याय की जननी रही है। धर्मेंद्र यादव खुद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं और सामाजिक न्याय की बात करते हैं, लेकिन यूजीसी रेगुलेशन जैसे गंभीर मुद्दे पर उनकी और समाजवादी पार्टी की चुप्पी 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की अवधारणा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।" नेताओं ने मांग की कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने सांसदों के साथ मिलकर सदन में इस मुद्दे को मजबूती से उठाएं। साथ ही, 'इंडिया' गठबंधन को भी इस विषय पर अपनी चुप्पी तोड़ने की चेतावनी दी गई है। "विश्वविद्यालयों में बच्चों को मरने के लिए नहीं भेजता समाज" वक्ताओं ने भावुक और कड़े स्वर में कहा कि देश का सबसे कमजोर तबका पेट काटकर अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए भेजता है। यदि वहां उन्हें भेदभाव के कारण 'संस्थागत हत्या' (Institutional Murder) की ओर धकेला जा रहा है, तो समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। प्रेस वार्ता के मुख्य बिंदु: जाति जनगणना: छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार जाति जनगणना की बात करती है, लेकिन वर्तमान जनगणना फॉर्म में जाति का कॉलम न होना धोखेबाजी है। सांसदों को चेतावनी: एससी/एसटी और ओबीसी वर्ग के सांसदों को आगाह किया गया कि वे सदन में समाज के प्रतिनिधि हैं। अगर वे बच्चों के भविष्य पर चुप रहे, तो जनता उन्हें माफ नहीं करेगी। ऐतिहासिक संदर्भ: वक्ताओं ने राम बचन यादव, चंद्रजीत यादव और राम नरेश यादव जैसे दिग्गजों का स्मरण करते हुए कहा कि आजमगढ़ ने हमेशा वंचितों की आवाज बुलंद की है, जिसे अब थमने नहीं दिया जाएगा। आंदोलन की अगली रणनीति डॉ. राजेंद्र यादव और सत्यम प्रजापति ने साझा बयान में कहा कि यूजीसी रेगुलेशन को लागू करवाना केवल एक प्रशासनिक मांग नहीं, बल्कि छात्रों के सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। आगामी दिनों में इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा और सड़कों से लेकर संसद तक सरकार और विपक्षी दलों को घेरा जाएगा।
सरायमीर (आजमगढ़) | शैक्षणिक संस्थानों में व्याप्त जातीय भेदभाव के खिलाफ 'यूजीसी रेगुलेशन' को लागू कराने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। आजमगढ़ के सरायमीर स्थित शालीमार रेस्टोरेंट में आयोजित एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता में विभिन्न विश्वविद्यालयों के पूर्व छात्र नेताओं ने हुंकार भरते हुए स्पष्ट किया कि यदि आगामी संसद सत्र में इस मुद्दे पर आवाज नहीं उठाई गई, तो सांसदों का घेराव किया जाएगा। धर्मेंद्र यादव और अखिलेश यादव से सीधे सवाल पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए जामिया मिलिया इस्लामिया के कलीम जमाई, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के राजीव यादव, और बीएचयू के वीरेंद्र यादव ने सीधे तौर पर आजमगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव पर निशाना साधा। नेताओं ने कहा: "आजमगढ़ सामाजिक न्याय की जननी रही है। धर्मेंद्र यादव खुद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं और सामाजिक न्याय की बात करते हैं, लेकिन यूजीसी रेगुलेशन जैसे गंभीर मुद्दे पर उनकी और समाजवादी पार्टी की चुप्पी 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की अवधारणा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।" नेताओं ने मांग की कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने सांसदों के साथ मिलकर सदन में इस मुद्दे को मजबूती से उठाएं। साथ ही, 'इंडिया' गठबंधन को भी इस विषय पर अपनी चुप्पी तोड़ने की चेतावनी दी गई है। "विश्वविद्यालयों में बच्चों को मरने के लिए नहीं भेजता समाज" वक्ताओं ने भावुक और कड़े स्वर में कहा कि देश का सबसे कमजोर तबका पेट काटकर अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए भेजता है। यदि वहां उन्हें भेदभाव के कारण 'संस्थागत हत्या' (Institutional Murder) की ओर धकेला जा रहा है, तो समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। प्रेस वार्ता के मुख्य बिंदु: जाति जनगणना: छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार जाति जनगणना की बात करती है, लेकिन वर्तमान जनगणना फॉर्म में जाति का कॉलम न होना धोखेबाजी है। सांसदों को चेतावनी: एससी/एसटी और ओबीसी वर्ग के सांसदों को आगाह किया गया कि वे सदन में समाज के प्रतिनिधि हैं। अगर वे बच्चों के भविष्य पर चुप रहे, तो जनता उन्हें माफ नहीं करेगी। ऐतिहासिक संदर्भ: वक्ताओं ने राम बचन यादव, चंद्रजीत यादव और राम नरेश यादव जैसे दिग्गजों का स्मरण करते हुए कहा कि आजमगढ़ ने हमेशा वंचितों की आवाज बुलंद की है, जिसे अब थमने नहीं दिया जाएगा। आंदोलन की अगली रणनीति डॉ. राजेंद्र यादव और सत्यम प्रजापति ने साझा बयान में कहा कि यूजीसी रेगुलेशन को लागू करवाना केवल एक प्रशासनिक मांग नहीं, बल्कि छात्रों के सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। आगामी दिनों में इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा और सड़कों से लेकर संसद तक सरकार और विपक्षी दलों को घेरा जाएगा।

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