आजमगढ़। सगड़ी तहसील क्षेत्र में जमीन के कथित फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। रौनापार थाने में दर्ज FIR में एक महिला ने अपने ससुर की जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने और कई बैनामे कराए जाने का आरोप लगाया है। मामले में पुलिस ने 12 नामजद आरोपियों समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। FIR 25 अगस्त 2026 को रौनापार थाने में दर्ज की गई।
क्या है पूरा मामला?
रौनापार थाना क्षेत्र के ग्राम आराजी देवारा करखिया निवासी भानमती पत्नी राजाराम ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया कि उनके ससुर स्व. अक्षैबर यादव की जमीन को कथित भूमाफिया द्वारा कूटरचित दस्तावेज तैयार कर हड़पने की कोशिश की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आधार कार्ड और निर्वाचन संबंधी दस्तावेज तैयार कर बिना वास्तविक भुगतान के जमीन के बैनामे करा लिए गए।
शिकायत में शेषनाथ यादव पुत्र नरसिंह यादव, निवासी हैदराबाद, रौनापार को कथित रूप से मुख्य कर्ताधर्ता बताया गया है। आरोप है कि शेषनाथ ने अपनी मां गीता देवी के नाम पर दो बैनामे कराए और इसके बाद अपने रिश्तेदारों के नाम पर भी कई बैनामे कराए गए।
FIR में इन लोगों के नाम
पुलिस रिकॉर्ड में नामजद आरोपियों में—
- शेषनाथ यादव, पुत्र नरसिंह यादव, निवासी हैदराबाद, रौनापार
- कौशल्या यादव, पत्नी विजई यादव, निवासी भवना, कप्तानगंज
- गीता देवी, पत्नी नरसिंह यादव, निवासी हैदराबाद, रौनापार
- संतू यादव, पुत्र गणेश यादव, निवासी आराजी अमानी, महाराजगंज
- प्रेमचंद्र यादव, पुत्र कोमल यादव, निवासी हैदराबाद, रौनापार
- बादामी देवी, पत्नी परमहंस, निवासी बासूपार बनकट, जीयनपुर
- सर्वजीत यादव, पुत्र संतू यादव, निवासी आराजी अमानी, महाराजगंज
- कमलेश यादव, पुत्र बृजभान यादव, निवासी भवना, कप्तानगंज
- अनिल यादव, पुत्र बृजभान यादव, निवासी भवना, कप्तानगंज
- अमरजीत यादव, पुत्र संतू यादव, निवासी आराजी अमानी, महाराजगंज
- पुरुषोत्तम यादव, पुत्र कुबेर यादव, निवासी हसनपट्टी, जीयनपुर
के नाम दर्ज हैं। FIR में इसके अतिरिक्त कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों के शामिल होने की बात भी दर्ज है।
सबसे बड़ा सवाल—इतने बैनामे हुए कैसे?
मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं तो इतने बड़े स्तर पर कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन के कई बैनामे आखिर कैसे हो गए?
जमीन के बैनामे की प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच और पहचान संबंधी औपचारिकताएं होती हैं। ऐसे में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी होगा कि कथित फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किस तरह किया गया और बैनामों की प्रक्रिया में कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे।
क्या संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन हुआ था? क्या संबंधित अभिलेखों की जांच की गई थी? यदि दस्तावेज वास्तव में फर्जी पाए जाते हैं तो उनकी पहचान प्रक्रिया में चूक कहां हुई? और यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा संलिप्तता सामने आती है, तो क्या उसकी भी जिम्मेदारी तय होगी?
ये सभी सवाल अब जांच के सामने हैं।
क्या जिम्मेदार विभाग की भूमिका भी जांच में आएगी?
मामले का सबसे अहम पहलू यही है। FIR में कथित फर्जी दस्तावेज और कई बैनामों का आरोप लगाया गया है। ऐसे में केवल जमीन के कथित लाभार्थियों या बैनामा कराने वालों की भूमिका की जांच पर्याप्त होगी या उन सभी स्तरों की भी पड़ताल होगी, जहां दस्तावेजों का सत्यापन और बैनामा प्रक्रिया पूरी हुई?
हालांकि FIR अपने आप में किसी विभागीय अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत साबित नहीं करती। लेकिन यदि जांच में दस्तावेजों की जालसाजी के साथ प्रक्रिया में किसी जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उस पर कार्रवाई होगी या नहीं—यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
पुलिस ने शुरू की जांच
रौनापार पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5), 319(2), 318(4), 338, 336(3) और 340(2) के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक सुभाष तिवारी को सौंपी गई है।
अब देखना यह होगा कि पुलिस की जांच केवल नामजद आरोपियों तक सीमित रहती है या फिर कथित फर्जी बैनामों की पूरी प्रक्रिया, इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों और उनकी सत्यापन प्रक्रिया की भी गहराई से जांच होती है।
फिलहाल आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। लेकिन सगड़ी तहसील से जुड़े इस मामले ने जमीन के दस्तावेजों की जांच और बैनामा प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।