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बेलहिया ढाला पर नाबालिगों के हाथों में नाव की कमान, बाढ़ के बीच यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़?

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| | 👁️ 14 | 📍 सगड़ी

सरयू का जलस्तर खतरा बिंदु से नीचे आने के बावजूद सगड़ी में कई रास्ते जलमग्न हैं। बेलहिया ढाला पर चल रही नावों में कथित तौर पर नाबालिगों के नाव चलाने के वीडियो सामने आने के बाद यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ बाल श्रम को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सगड़ी (आजमगढ़)। सरयू नदी का जलस्तर खतरा बिंदु से नीचे आने के बावजूद सगड़ी तहसील के उत्तरी छोर पर बाढ़ की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। महुला-गढ़वल बांध के उत्तर तरफ कई संपर्क मार्ग अब भी पानी में डूबे हैं। ऐसे में ग्रामीणों के लिए नाव ही आवागमन का सहारा बनी हुई है। प्रशासन की ओर से कई स्थानों पर नावें चलवाई जा रही हैं। लेकिन बेलहिया ढाला से सामने आए फोटो और वीडियो ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां चल रही चार नावों में कथित तौर पर नाबालिग बच्चे नाव चलाते दिखाई दे रहे हैं। नाव में महिलाएं, पुरुष और बच्चे बैठे हैं, ग्रामीण अपना सामान लेकर पानी के बीच से सफर कर रहे हैं। अब सवाल सिर्फ नाव में बैठे यात्रियों की सुरक्षा का नहीं है, बल्कि नाबालिगों से काम लिए जाने को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। मान भी लिया जाए कि ये बच्चे नाव चलाने में पूरी तरह दक्ष हैं, तो क्या प्रशासन की निगरानी में नाबालिग बच्चों से इस तरह नाव चलाने का काम लिया जा सकता है? और अगर ये बच्चे मजबूरी में अपनी आजीविका चलाने के लिए नाव चला रहे हैं, तो क्या यह बाल श्रम से जुड़े नियमों के दायरे में नहीं आता? क्या प्रशासन ने इन बच्चों की उम्र की जांच कराई है? क्या नाव संचालन के लिए उनकी कोई वैध अनुमति, प्रशिक्षण या सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है? सबसे बड़ा सवाल—बाढ़ जैसी जोखिम भरी स्थिति में यात्रियों की जिंदगी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यदि नाव चलाने वाले नाबालिग हैं और नाव पर महिलाएं, बच्चे और पुरुष सवार हैं, तो किसी दुर्घटना की स्थिति में जवाबदेही कौन तय करेगा? मामले की जानकारी लेने के लिए क्षेत्रीय लेखपाल से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन नहीं उठा। ऐसे में प्रशासन से यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि बेलहिया ढाला पर संचालित नावों की निगरानी कौन कर रहा है और यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई है। ग्रामीणों की मजबूरी अपनी जगह है। रास्ते पानी में डूबे हैं और नाव के बिना आवागमन मुश्किल है। लेकिन मजबूरी के नाम पर सुरक्षा से समझौता और नाबालिगों से काम लिया जाना—दोनों सवालों का जवाब प्रशासन को देना होगा।

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