📸 कोई मुख्य फोटो नहीं
राजनीति
33 लाख की जमीन ठगी में पांच और गिरफ्तार — फर्जी नक्शा दिखाकर बेची बंजर जमीन, पैसे मांगे तो दी धमकी
|
📅 23 Mar 2026, 05:23 PM
|
👁️ 49
आजमगढ़ में फर्जी नक्शा व जाली दस्तावेज बनाकर 33 लाख 30 हजार की जमीन ठगने वाले गिरोह के 5 सदस्य गिरफ्तार। बंजर जमीन को असली बताकर ठगा, पैसे मांगे तो दी जान से मारने की धमकी। मुख्य आरोपी पहले से जेल में
आजमगढ़ में फर्जी नक्शा व जाली दस्तावेज बनाकर 33 लाख 30 हजार की जमीन ठगने वाले गिरोह के 5 सदस्य गिरफ्तार। बंजर जमीन को असली बताकर ठगा, पैसे मांगे तो दी जान से मारने की धमकी। मुख्य आरोपी पहले से जेल में
आजमगढ़। जमीन खरीदने का सपना देखने वाले एक व्यक्ति को 33 लाख 30 हजार रुपये की चपत लगाने वाले गिरोह पर थाना कोतवाली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। फर्जी नक्शे और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर सुनियोजित ठगी करने वाले इस गिरोह के पांच और सदस्यों को सोमवार दोपहर बाग लखराव पुलिया के पास से गिरफ्तार किया गया। इससे पहले मुख्य आरोपी को 8 मार्च को ही दबोचा जा चुका था। अब तक इस मामले में कुल छह आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
कैसे रची गई ठगी की साजिश?
थाना कोतवाली क्षेत्र के मधुबन, कन्धरापुर निवासी रूद्रान्श राय पुत्र विनोद राय ने पुलिस को दी अपनी तहरीर में बताया कि मुख्य आरोपी कृष्ण चन्द्र राय और उसके परिजनों व सहयोगियों ने मिलकर एक सुनियोजित जाल बिछाया। गिरोह ने कोडर अजमतपुर स्थित एक भूमि को असली और कीमती बताकर उसके फर्जी नक्शे और जाली दस्तावेज तैयार किए। पीड़ित को विश्वास में लेकर किस्तों में भुगतान का लालच दिया गया और धीरे-धीरे कुल 33 लाख 30 हजार रुपये ऐंठ लिए गए।
जब रूद्रान्श राय ने जमीन का मुआयना किया तो पता चला कि जो जमीन उन्हें दिखाई गई थी, उसका अधिकांश हिस्सा बंजर था और गाटा संख्या भी असंबंधित थी — यानी दस्तावेज पूरी तरह फर्जी थे।
पैसे मांगे तो मिली धमकी
जब ठगी का एहसास हुआ और पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों का असली चेहरा सामने आया। गिरोह के सदस्यों ने पैसे लौटाने की बजाय गाली-गलौज की, जान से मारने की धमकी दी और झूठे मुकदमों में फंसाने की बात कही। इसके बाद पीड़ित ने थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने मुकदमा अपराध संख्या 92/2026 के तहत BNS की धारा 319(2), 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 352, 351(3) और 111(7) के अंतर्गत गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया।
मुख्य आरोपी पहले ही जा चुका है जेल
इस प्रकरण में मुख्य साजिशकर्ता कृष्ण चन्द्र राय पुत्र सुखसागर राय (उम्र करीब 49 वर्ष) निवासी मुहम्मदपुर फेटी, थाना बरदह को पुलिस 8 मार्च 2026 को ही गिरफ्तार कर चुकी थी। सोमवार को उसके पांच साथियों को भी सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया।
बैंक खातों से हुआ रकम का बंटवारा
पूछताछ में सभी पांचों आरोपियों ने स्वीकार किया कि ठगी की रकम अलग-अलग तारीखों पर उनके बैंक खातों में आती रही, जिसे वे निकालकर मुख्य आरोपी कृष्ण चन्द्र राय और उसके परिवार के साथ आपस में बांट लेते थे। यह खुलासा साबित करता है कि यह महज व्यक्तिगत ठगी नहीं, बल्कि एक सुगठित वित्तीय अपराध गिरोह था जो बकायदा बैंकिंग चैनल के जरिए काम कर रहा था।
कौन हैं पांचों गिरफ्तार आरोपी?
सभी पांचों आरोपी अजमतपुर कोडर, थाना कोतवाली के ही रहने वाले हैं —
जितेन्द्र कुमार पुत्र श्यामधारी (उम्र करीब 42 वर्ष) — यह पहले से दागी है। इसके खिलाफ थाना सिधारी में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र के मामले पहले से दर्ज हैं।
अभय कुमार पुत्र स्व. प्रमोद (उम्र करीब 22 वर्ष) — सबसे कम उम्र का आरोपी, जो गिरोह में शामिल हो चुका था।
विजय कुमार पुत्र स्व. सुरेश (उम्र करीब 48 वर्ष) — पूछताछ में रकम बंटवारे की पुष्टि की।
महेन्द्र कुमार पुत्र बृजभूषण (उम्र करीब 40 वर्ष) — बैंक खाते के जरिए रकम प्राप्त करने में शामिल।
दीपक पुत्र स्व. सुरेश (उम्र करीब 54 वर्ष) — गिरोह के सबसे उम्रदराज सदस्य।
सभी को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
ऐसे हुई गिरफ्तारी
निरीक्षक रफी आलम के नेतृत्व में पुलिस टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी बाग लखराव पुलिया के पास एकत्र हैं। सोमवार दोपहर करीब 1:50 बजे टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी पांचों को घेर लिया और गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी टीम में निरीक्षक रफी आलम, हेड कांस्टेबल धर्मेन्द्र तिवारी, कांस्टेबल अखिलेश यादव और कांस्टेबल काशी कुमार शामिल रहे।
जमीन खरीदने वालों के लिए चेतावनी
यह मामला एक बार फिर यह याद दिलाता है कि जमीन की खरीद-फरोख्त में किसी भी दस्तावेज पर आंख मूंदकर भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि भूमि क्रय-विक्रय से पहले राजस्व विभाग से दस्तावेजों का पूर्ण सत्यापन अवश्य कराएं।
जनपद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के संगठित ठगी गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
आजमगढ़। जमीन खरीदने का सपना देखने वाले एक व्यक्ति को 33 लाख 30 हजार रुपये की चपत लगाने वाले गिरोह पर थाना कोतवाली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। फर्जी नक्शे और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर सुनियोजित ठगी करने वाले इस गिरोह के पांच और सदस्यों को सोमवार दोपहर बाग लखराव पुलिया के पास से गिरफ्तार किया गया। इससे पहले मुख्य आरोपी को 8 मार्च को ही दबोचा जा चुका था। अब तक इस मामले में कुल छह आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
कैसे रची गई ठगी की साजिश?
थाना कोतवाली क्षेत्र के मधुबन, कन्धरापुर निवासी रूद्रान्श राय पुत्र विनोद राय ने पुलिस को दी अपनी तहरीर में बताया कि मुख्य आरोपी कृष्ण चन्द्र राय और उसके परिजनों व सहयोगियों ने मिलकर एक सुनियोजित जाल बिछाया। गिरोह ने कोडर अजमतपुर स्थित एक भूमि को असली और कीमती बताकर उसके फर्जी नक्शे और जाली दस्तावेज तैयार किए। पीड़ित को विश्वास में लेकर किस्तों में भुगतान का लालच दिया गया और धीरे-धीरे कुल 33 लाख 30 हजार रुपये ऐंठ लिए गए।
जब रूद्रान्श राय ने जमीन का मुआयना किया तो पता चला कि जो जमीन उन्हें दिखाई गई थी, उसका अधिकांश हिस्सा बंजर था और गाटा संख्या भी असंबंधित थी — यानी दस्तावेज पूरी तरह फर्जी थे।
पैसे मांगे तो मिली धमकी
जब ठगी का एहसास हुआ और पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों का असली चेहरा सामने आया। गिरोह के सदस्यों ने पैसे लौटाने की बजाय गाली-गलौज की, जान से मारने की धमकी दी और झूठे मुकदमों में फंसाने की बात कही। इसके बाद पीड़ित ने थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने मुकदमा अपराध संख्या 92/2026 के तहत BNS की धारा 319(2), 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 352, 351(3) और 111(7) के अंतर्गत गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया।
मुख्य आरोपी पहले ही जा चुका है जेल
इस प्रकरण में मुख्य साजिशकर्ता कृष्ण चन्द्र राय पुत्र सुखसागर राय (उम्र करीब 49 वर्ष) निवासी मुहम्मदपुर फेटी, थाना बरदह को पुलिस 8 मार्च 2026 को ही गिरफ्तार कर चुकी थी। सोमवार को उसके पांच साथियों को भी सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया।
बैंक खातों से हुआ रकम का बंटवारा
पूछताछ में सभी पांचों आरोपियों ने स्वीकार किया कि ठगी की रकम अलग-अलग तारीखों पर उनके बैंक खातों में आती रही, जिसे वे निकालकर मुख्य आरोपी कृष्ण चन्द्र राय और उसके परिवार के साथ आपस में बांट लेते थे। यह खुलासा साबित करता है कि यह महज व्यक्तिगत ठगी नहीं, बल्कि एक सुगठित वित्तीय अपराध गिरोह था जो बकायदा बैंकिंग चैनल के जरिए काम कर रहा था।
कौन हैं पांचों गिरफ्तार आरोपी?
सभी पांचों आरोपी अजमतपुर कोडर, थाना कोतवाली के ही रहने वाले हैं —
जितेन्द्र कुमार पुत्र श्यामधारी (उम्र करीब 42 वर्ष) — यह पहले से दागी है। इसके खिलाफ थाना सिधारी में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र के मामले पहले से दर्ज हैं।
अभय कुमार पुत्र स्व. प्रमोद (उम्र करीब 22 वर्ष) — सबसे कम उम्र का आरोपी, जो गिरोह में शामिल हो चुका था।
विजय कुमार पुत्र स्व. सुरेश (उम्र करीब 48 वर्ष) — पूछताछ में रकम बंटवारे की पुष्टि की।
महेन्द्र कुमार पुत्र बृजभूषण (उम्र करीब 40 वर्ष) — बैंक खाते के जरिए रकम प्राप्त करने में शामिल।
दीपक पुत्र स्व. सुरेश (उम्र करीब 54 वर्ष) — गिरोह के सबसे उम्रदराज सदस्य।
सभी को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
ऐसे हुई गिरफ्तारी
निरीक्षक रफी आलम के नेतृत्व में पुलिस टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी बाग लखराव पुलिया के पास एकत्र हैं। सोमवार दोपहर करीब 1:50 बजे टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी पांचों को घेर लिया और गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी टीम में निरीक्षक रफी आलम, हेड कांस्टेबल धर्मेन्द्र तिवारी, कांस्टेबल अखिलेश यादव और कांस्टेबल काशी कुमार शामिल रहे।
जमीन खरीदने वालों के लिए चेतावनी
यह मामला एक बार फिर यह याद दिलाता है कि जमीन की खरीद-फरोख्त में किसी भी दस्तावेज पर आंख मूंदकर भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि भूमि क्रय-विक्रय से पहले राजस्व विभाग से दस्तावेजों का पूर्ण सत्यापन अवश्य कराएं।
जनपद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के संगठित ठगी गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।