📸 कोई मुख्य फोटो नहीं
राजनीति
आजमगढ़ एनकाउंटर: 'सफेदपोश' चोले के पीछे 'हिस्ट्रीशीटर' का चेहरा? पुलिस ने खंगाले 1000 कैमरे, दावों से मचा हड़कंप!
|
📅 20 Apr 2026, 07:48 AM
|
👁️ 51
आजमगढ़ में भाजपा कार्यकर्ता अभिषेक सिंह के एनकाउंटर ने सियासी भूचाल ला दिया है। पुलिस का दावा है कि 1000 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज ने लूट की पोल खोली है, वहीं विपक्ष और परिजन इसे एक बड़ी साजिश बता रहे
आजमगढ़ में भाजपा कार्यकर्ता अभिषेक सिंह के एनकाउंटर ने सियासी भूचाल ला दिया है। पुलिस का दावा है कि 1000 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज ने लूट की पोल खोली है, वहीं विपक्ष और परिजन इसे एक बड़ी साजिश बता रहे
आजमगढ़। आजमगढ़ पुलिस ने जियो मैनेजर लूट कांड में घायल भाजपा बूथ अध्यक्ष अभिषेक सिंह को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है। पुलिस का कहना है कि जिसे 'निर्दोष' बताया जा रहा है, उसका दामन दागदार है और उसके पीछे लबा-चौड़ा आपराधिक इतिहास छिपा है। खाकी के इस नए वार ने जिले की सियासत में बारूद भरने का काम किया है।
1000 कैमरों की 'नजर' और डिजिटल गवाही
पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई हवा-हवाई नहीं, बल्कि ठोस डिजिटल सबूतों पर टिकी है।
डिजिटल चक्रव्यूह: पुलिस के मुताबिक, घटना के रूट पर पड़ने वाले 1000 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों को घंटों खंगाला गया।
चेहरे का मिलान: करीब 100 कैमरों में संदिग्धों की ऐसी हरकतें कैद हुई हैं, जो सीधे तौर पर अभिषेक सिंह और उसके साथियों की संलिप्तता की ओर इशारा करती हैं। पुलिस का दावा है कि फुटेज में आरोपियों के चेहरे साफ तौर पर पहचाने गए हैं।
पुरानी फाइलों से निकला 'अपराधिक कच्चा चिट्ठा'
पुलिस ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें अभिषेक को बेदाग बताया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए दावा किया है कि: अभिषेक सिंह पर पहले से ही गंभीर धाराओं में दो मुकदमे दर्ज हैं।
जिले की अपराध फाइलों में उसका नाम नया नहीं है; वह पहले भी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल रहा है।
पुलिस का तर्क है कि 'बूथ अध्यक्ष' का पद सिर्फ एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था, जबकि असलियत अपराध की गलियों से जुड़ी है।
सत्ता और विपक्ष के बीच फंसी 'खाकी'
एक तरफ MLC देवेंद्र प्रताप सिंह जैसे दिग्गज पुलिस को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस ने "जीरो टॉलरेंस" का हवाला देकर पीछे हटने से मना कर दिया है।
सांसद धर्मेंद्र यादव पर लग रहे आरोपों के बीच पुलिस का यह 'हिस्ट्रीशीटर' वाला दावा मामले को नया मोड़ दे चुका है।
जनता के बीच अब यह बहस छिड़ गई है कि क्या वाकई एक कार्यकर्ता के रूप में अपराधी फल-फूल रहा था, या फिर पुलिस अपनी कार्रवाई को सही ठहराने के लिए पुरानी फाइलों की धूल झाड़ रही है?
"किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी दल या पद से जुड़ा हो। हमारे पास पुख्ता तकनीकी साक्ष्य और फुटेज मौजूद हैं।"
— प्रशासनिक रुख
सुलगते सवाल
अगर अभिषेक का इतिहास इतना ही दागदार था, तो वह अब तक कानून की नजरों से कैसे बचा रहा? और अगर पुलिस के पास 1000 कैमरों की फुटेज है, तो क्या उसे सार्वजनिक कर इन सियासी चर्चाओं पर विराम लगाया जाएगा? आजमगढ़ में फिलहाल 'क्राइम' और 'पॉलिटिक्स' का ऐसा घालमेल दिख रहा है, जिसकी आंच आने वाले दिनों में और तेज होगी।
आजमगढ़। आजमगढ़ पुलिस ने जियो मैनेजर लूट कांड में घायल भाजपा बूथ अध्यक्ष अभिषेक सिंह को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है। पुलिस का कहना है कि जिसे 'निर्दोष' बताया जा रहा है, उसका दामन दागदार है और उसके पीछे लबा-चौड़ा आपराधिक इतिहास छिपा है। खाकी के इस नए वार ने जिले की सियासत में बारूद भरने का काम किया है।
1000 कैमरों की 'नजर' और डिजिटल गवाही
पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई हवा-हवाई नहीं, बल्कि ठोस डिजिटल सबूतों पर टिकी है।
डिजिटल चक्रव्यूह: पुलिस के मुताबिक, घटना के रूट पर पड़ने वाले 1000 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों को घंटों खंगाला गया।
चेहरे का मिलान: करीब 100 कैमरों में संदिग्धों की ऐसी हरकतें कैद हुई हैं, जो सीधे तौर पर अभिषेक सिंह और उसके साथियों की संलिप्तता की ओर इशारा करती हैं। पुलिस का दावा है कि फुटेज में आरोपियों के चेहरे साफ तौर पर पहचाने गए हैं।
पुरानी फाइलों से निकला 'अपराधिक कच्चा चिट्ठा'
पुलिस ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें अभिषेक को बेदाग बताया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए दावा किया है कि: अभिषेक सिंह पर पहले से ही गंभीर धाराओं में दो मुकदमे दर्ज हैं।
जिले की अपराध फाइलों में उसका नाम नया नहीं है; वह पहले भी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल रहा है।
पुलिस का तर्क है कि 'बूथ अध्यक्ष' का पद सिर्फ एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था, जबकि असलियत अपराध की गलियों से जुड़ी है।
सत्ता और विपक्ष के बीच फंसी 'खाकी'
एक तरफ MLC देवेंद्र प्रताप सिंह जैसे दिग्गज पुलिस को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस ने "जीरो टॉलरेंस" का हवाला देकर पीछे हटने से मना कर दिया है।
सांसद धर्मेंद्र यादव पर लग रहे आरोपों के बीच पुलिस का यह 'हिस्ट्रीशीटर' वाला दावा मामले को नया मोड़ दे चुका है।
जनता के बीच अब यह बहस छिड़ गई है कि क्या वाकई एक कार्यकर्ता के रूप में अपराधी फल-फूल रहा था, या फिर पुलिस अपनी कार्रवाई को सही ठहराने के लिए पुरानी फाइलों की धूल झाड़ रही है?
"किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी दल या पद से जुड़ा हो। हमारे पास पुख्ता तकनीकी साक्ष्य और फुटेज मौजूद हैं।"
— प्रशासनिक रुख
सुलगते सवाल
अगर अभिषेक का इतिहास इतना ही दागदार था, तो वह अब तक कानून की नजरों से कैसे बचा रहा? और अगर पुलिस के पास 1000 कैमरों की फुटेज है, तो क्या उसे सार्वजनिक कर इन सियासी चर्चाओं पर विराम लगाया जाएगा? आजमगढ़ में फिलहाल 'क्राइम' और 'पॉलिटिक्स' का ऐसा घालमेल दिख रहा है, जिसकी आंच आने वाले दिनों में और तेज होगी।