आजमगढ़: अतरौलिया में बोर्ड परीक्षा के दौरान ‘मुन्ना भाई’ गिरफ्तार, भाई को पास कराने के लिए खुद बैठ गया परीक्षा देने; दोनों भाइयों पर FIR
आजमगढ़ के अतरौलिया में हाईस्कूल अंग्रेजी की परीक्षा में सगे भाई की जगह पेपर देते 'मुन्ना भाई' को पुलिस ने पकड़ा। उद्योग विद्यालय इंटर कॉलेज कोयलसा की घटना। दोनों भाइयों पर FIR दर्ज।
आजमगढ़ के अतरौलिया में हाईस्कूल अंग्रेजी की परीक्षा में सगे भाई की जगह पेपर देते 'मुन्ना भाई' को पुलिस ने पकड़ा। उद्योग विद्यालय इंटर कॉलेज कोयलसा की घटना। दोनों भाइयों पर FIR दर्ज।
आजमगढ़ (द पब्लिक एक्सप्रेस): उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) की हाईस्कूल की परीक्षाओं में शासन की तमाम सख्ती और चौकसी के बावजूद नकल माफिया और फर्जीवाड़ा करने वाले बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला आजमगढ़ जिले के अतरौलिया थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहाँ एक युवक अपने सगे भाई को पास कराने के चक्कर में खुद 'मुन्ना भाई' बनकर अंग्रेजी की परीक्षा देने पहुंच गया। लेकिन कक्ष निरीक्षक की सतर्कता ने इस फर्जीवाड़े की कलई खोल दी। पुलिस ने मामले में दोनों सगे भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
कैसे हुआ 'मुन्ना भाई' का भंडाफोड़?
मामला अतरौलिया क्षेत्र के उद्योग विद्यालय इंटर कॉलेज कोयलसा का है। सोमवार, 23 फरवरी 2026 को हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा के तहत अंग्रेजी विषय का पेपर चल रहा था। परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा और शुचिता के कड़े इंतजाम थे। इसी बीच, कमरा नंबर (कक्ष) में ड्यूटी कर रहे शिक्षक प्रवीण कुमार सिंह को एक परीक्षार्थी पर संदेह हुआ।
जब प्रवीण कुमार सिंह ने उपस्थिति पत्रक (Attendance Sheet) का मिलान परीक्षार्थी के चेहरे और प्रवेश पत्र से किया, तो विवरण में भारी अंतर पाया गया। प्रवेश पत्र पर लगी फोटो और सामने बैठे युवक के चेहरे में असमानता देखते ही कक्ष निरीक्षक ने गहनता से पूछताछ शुरू की। पहले तो युवक ने बरगलाने की कोशिश की, लेकिन सख्ती बरतने पर उसने सच उगल दिया।
सगे भाई की जगह बैठा था पंकज
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि असली परीक्षार्थी आशिष कुमार पुत्र भूपत (निवासी ग्राम सम्मोपुर, पोस्ट गोपालपुर, पल्हनी थाना सिधारी, आजमगढ़) था। लेकिन उसकी जगह उसका सगा भाई पंकज कुमार परीक्षा दे रहा था। पंकज ने सोचा था कि अंग्रेजी का कठिन पेपर वह अपने भाई की जगह हल कर देगा और किसी को पता नहीं चलेगा, लेकिन सीसीटीवी कैमरों और शिक्षकों की पैनी नजर से वह बच नहीं सका।
पुलिस की सख्त कार्रवाई: दर्ज हुआ मुकदमा
केंद्र व्यवस्थापक डॉ. रणधीर सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पुलिस को सूचित किया। उन्होंने अतरौलिया थाने में लिखित तहरीर देकर दोनों भाइयों के खिलाफ जालसाजी और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पंकज कुमार को हिरासत में ले लिया है और असली परीक्षार्थी आशीष के खिलाफ भी साजिश रचने का मामला दर्ज किया है।
शिक्षा विभाग में हड़कंप
इस घटना के बाद जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ने केंद्र व्यवस्थापक को निर्देश दिए हैं कि प्रवेश पत्र की जांच में किसी भी तरह की ढिलाई न बरती जाए। अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत बोर्ड परीक्षाओं को नकल विहीन बनाने के लिए सख्त निर्देश हैं। ऐसे में जो भी छात्र या बाहरी व्यक्ति इस तरह के कृत्य में शामिल पाया जाएगा, उसे जेल की हवा खानी होगी।
द पब्लिक एक्सप्रेस का विश्लेषण: क्यों भारी पड़ता है ऐसा शॉर्टकट?
बोर्ड परीक्षा में दूसरे की जगह बैठना न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह छात्र के भविष्य को पूरी तरह बर्बाद कर देता है।
- करियर पर दाग: एक बार एफआईआर दर्ज होने के बाद सरकारी नौकरी के रास्ते बंद हो जाते हैं।
- डिग्री पर प्रतिबंध: ऐसे छात्रों को बोर्ड द्वारा हमेशा के लिए डिबार (प्रतिबंधित) किया जा सकता है।
- पारिवारिक बदनामी: सगे भाइयों का इस तरह से जेल जाना पूरे परिवार के लिए सामाजिक कलंक बन जाता है।
अभिभावकों को भी यह समझने की जरूरत है कि बच्चों को मेहनत के बल पर परीक्षा पास करने के लिए प्रेरित करें, न कि ऐसे गैर-कानूनी रास्तों का सहारा लें।
आजमगढ़ (द पब्लिक एक्सप्रेस): उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) की हाईस्कूल की परीक्षाओं में शासन की तमाम सख्ती और चौकसी के बावजूद नकल माफिया और फर्जीवाड़ा करने वाले बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला आजमगढ़ जिले के अतरौलिया थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहाँ एक युवक अपने सगे भाई को पास कराने के चक्कर में खुद 'मुन्ना भाई' बनकर अंग्रेजी की परीक्षा देने पहुंच गया। लेकिन कक्ष निरीक्षक की सतर्कता ने इस फर्जीवाड़े की कलई खोल दी। पुलिस ने मामले में दोनों सगे भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
कैसे हुआ 'मुन्ना भाई' का भंडाफोड़?
मामला अतरौलिया क्षेत्र के उद्योग विद्यालय इंटर कॉलेज कोयलसा का है। सोमवार, 23 फरवरी 2026 को हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा के तहत अंग्रेजी विषय का पेपर चल रहा था। परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा और शुचिता के कड़े इंतजाम थे। इसी बीच, कमरा नंबर (कक्ष) में ड्यूटी कर रहे शिक्षक प्रवीण कुमार सिंह को एक परीक्षार्थी पर संदेह हुआ।
जब प्रवीण कुमार सिंह ने उपस्थिति पत्रक (Attendance Sheet) का मिलान परीक्षार्थी के चेहरे और प्रवेश पत्र से किया, तो विवरण में भारी अंतर पाया गया। प्रवेश पत्र पर लगी फोटो और सामने बैठे युवक के चेहरे में असमानता देखते ही कक्ष निरीक्षक ने गहनता से पूछताछ शुरू की। पहले तो युवक ने बरगलाने की कोशिश की, लेकिन सख्ती बरतने पर उसने सच उगल दिया।
सगे भाई की जगह बैठा था पंकज
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि असली परीक्षार्थी आशिष कुमार पुत्र भूपत (निवासी ग्राम सम्मोपुर, पोस्ट गोपालपुर, पल्हनी थाना सिधारी, आजमगढ़) था। लेकिन उसकी जगह उसका सगा भाई पंकज कुमार परीक्षा दे रहा था। पंकज ने सोचा था कि अंग्रेजी का कठिन पेपर वह अपने भाई की जगह हल कर देगा और किसी को पता नहीं चलेगा, लेकिन सीसीटीवी कैमरों और शिक्षकों की पैनी नजर से वह बच नहीं सका।
पुलिस की सख्त कार्रवाई: दर्ज हुआ मुकदमा
केंद्र व्यवस्थापक डॉ. रणधीर सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पुलिस को सूचित किया। उन्होंने अतरौलिया थाने में लिखित तहरीर देकर दोनों भाइयों के खिलाफ जालसाजी और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पंकज कुमार को हिरासत में ले लिया है और असली परीक्षार्थी आशीष के खिलाफ भी साजिश रचने का मामला दर्ज किया है।
शिक्षा विभाग में हड़कंप
इस घटना के बाद जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ने केंद्र व्यवस्थापक को निर्देश दिए हैं कि प्रवेश पत्र की जांच में किसी भी तरह की ढिलाई न बरती जाए। अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत बोर्ड परीक्षाओं को नकल विहीन बनाने के लिए सख्त निर्देश हैं। ऐसे में जो भी छात्र या बाहरी व्यक्ति इस तरह के कृत्य में शामिल पाया जाएगा, उसे जेल की हवा खानी होगी।
द पब्लिक एक्सप्रेस का विश्लेषण: क्यों भारी पड़ता है ऐसा शॉर्टकट?
बोर्ड परीक्षा में दूसरे की जगह बैठना न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह छात्र के भविष्य को पूरी तरह बर्बाद कर देता है।
- करियर पर दाग: एक बार एफआईआर दर्ज होने के बाद सरकारी नौकरी के रास्ते बंद हो जाते हैं।
- डिग्री पर प्रतिबंध: ऐसे छात्रों को बोर्ड द्वारा हमेशा के लिए डिबार (प्रतिबंधित) किया जा सकता है।
- पारिवारिक बदनामी: सगे भाइयों का इस तरह से जेल जाना पूरे परिवार के लिए सामाजिक कलंक बन जाता है।
अभिभावकों को भी यह समझने की जरूरत है कि बच्चों को मेहनत के बल पर परीक्षा पास करने के लिए प्रेरित करें, न कि ऐसे गैर-कानूनी रास्तों का सहारा लें।