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राजनीति

Allahabad High Court on UP Police: 'ठोक दो' नीति पर हाई कोर्ट का हथौड़ा! पूछा- पैर में गोली मारने का आदेश किसने दिया?

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| 📅 31 Jan 2026, 05:58 PM | 👁️ 44

UP Police Encounter: 'सिंघम गिरी' पर हाई कोर्ट का ब्रेक! पूछा- पैर में गोली मारने का आदेश किसने दिया? लंगड़ा एनकाउंटर मॉडल पर सवाल

लखनऊ/प्रयागराज (Digital Desk):

उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था में बहुचर्चित 'ठोक दो' नीति और पुलिस के 'हाफ एनकाउंटर' (Half Encounter) मॉडल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने अब तक की सबसे सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने यूपी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि "क्या पुलिस को अपराधियों के पैरों में गोली मारने का कोई लिखित या मौखिक आदेश मिला है?"

​हाई कोर्ट की इस टिप्पणी ने लखनऊ से लेकर नोएडा तक के पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पुलिस का काम जांच करना है, 'जज' बनकर सजा देना नहीं।

सिंघम बनने की होड़ में कानून का मखौल?

​इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार देशवाल (Justice Arun Kumar Deshwal) की बेंच ने मिर्जापुर के एक मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस की 'घिसी-पिटी स्क्रिप्ट' की धज्जियां उड़ा दीं। कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा कि ऐसा लगता है जैसे पुलिसकर्मी सिर्फ सीनियर अधिकारियों को खुश करने और सोशल मीडिया पर वाहवाही (Social Media Fame) लूटने के लिए एनकाउंटर कर रहे हैं।

​कोर्ट ने कहा, "हर बार कहानी एक ही होती है— अपराधी ने गोली चलाई, पुलिस बच गई और जवाबी फायर में गोली सीधे आरोपी के पैर में लगी। यह लोकतंत्र है, यहाँ पुलिस का डंडा नहीं, कानून का राज चलता है।"

मिर्जापुर के 'राजू' केस ने खोली पोल

​यह पूरा मामला मिर्जापुर के राजू उर्फ राजकुमार से जुड़ा है। पुलिस ने दावा किया था कि मुठभेड़ के दौरान आत्मरक्षा में गोली चलाई गई जिससे आरोपी घायल हो गया। लेकिन जब हाई कोर्ट ने केस डायरी खंगाली, तो पाया कि न तो मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराए गए और न ही डॉक्टर की गवाही सही तरीके से ली गई। यह सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की गाइडलाइंस का उल्लंघन था।

अखिलेश यादव का योगी सरकार पर वार

​हाई कोर्ट की फटकार के बाद सियासत भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने योगी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने 'एक्स' (Twitter) पर लिखा कि "झूठे एनकाउंटर प्रशासन को भ्रष्ट बनाते हैं।" विपक्ष का आरोप है कि 'ठोक दो' की नीति ने पुलिस को बेलगाम कर दिया है।

अब नपेगा 'कप्तान', जारी हुई 6 सूत्रीय गाइडलाइन

​हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चेतावनी जारी की है कि अगर भविष्य में एनकाउंटर के दौरान सुप्रीम कोर्ट के 'पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र' (PUCL vs State of Maharashtra) केस के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तो इसके लिए सीधे जिले के SP और SSP जिम्मेदार माने जाएंगे।

कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?

  1. ​एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
  2. ​घायल आरोपी का बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हो।
  3. ​मेडिकल रिपोर्ट में डॉक्टर की स्पष्ट राय हो।
  4. ​पुलिस को आत्मरक्षा (Self Defense) का ठोस सबूत देना होगा।

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