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Breaking: Village was shaken by double murder on the day of Dussehra, now life imprisonment to 9 including Vip...
अपराध

दशहरे के दिन डबल मर्डर से दहला था गांव, अब विपिन सिंह समेत 9 को उम्रकैद

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| | 👁️ 52 | 📍 Azamgarh

आजमगढ़ की अदालत ने 2007 के दोहरे हत्याकांड में रानी की सराय ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह समेत नौ दोषियों को उम्रकैद और 74-74 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

आजमगढ़। प्रधानी के चुनाव की रंजिश में करीब 19 साल पहले हुए दोहरे हत्याकांड में आजमगढ़ की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। रानी की सराय के ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह समेत नौ आरोपियों को दो लोगों की हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 74-74 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। फैसले के बाद विपिन सिंह ने कहा कि वह अदालत के निर्णय का सम्मान करते हैं।

दशहरे के दिन हुई थी दो लोगों की हत्या

अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 21 अक्टूबर 2007 की है। दशहरे के दिन सुबह करीब नौ बजे रानी की सराय थाना क्षेत्र के रुदरी गांव निवासी रामजन्म सिंह अपने दरवाजे पर बैठे थे। इसी दौरान ग्राम प्रधान विपिन सिंह समेत 10 लोग कथित तौर पर हथियारों के साथ वहां पहुंचे।

आरोप है कि विपिन सिंह के ललकारने पर मौके पर भगदड़ मच गई। इसी दौरान विपिन सिंह ने तालुकदार सिंह को गोली मार दी, जबकि राजेश सिंह ने पारसनाथ सिंह को गोली मार दी। वहीं, अन्य आरोपियों पर रामजन्म सिंह, उनके भतीजे अंकित सिंह और आशीष के साथ लाठी-डंडों से मारपीट करने का आरोप लगा। गोली लगने से तालुकदार सिंह और पारसनाथ सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच कर आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान एक आरोपी राधेश्याम सिंह की मौत हो गई। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 17 गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने नौ आरोपियों को हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

वर्ष 2000 में पहली बार बने थे ग्राम प्रधान

विपिन सिंह का राजनीतिक सफर वर्ष 2000 में ग्राम प्रधान चुने जाने के साथ शुरू हुआ था। वर्ष 2005 में वह दोबारा ग्राम प्रधान बने। इसके बाद 2015 से 2020 तक जिला पंचायत सदस्य रहे। वर्ष 2020 से वह रानी की सराय ब्लॉक के प्रमुख हैं। वह भारतीय जनता पार्टी से भी जुड़े हुए हैं।

विपिन सिंह ने भी दर्ज कराया था मुकदमा

इसी घटना के संबंध में विपिन सिंह की ओर से भी कातिलाना हमले की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसमें रामदरस, आशीष सिंह, अंकित सिंह, दीपक सिंह और रामजन्म सिंह समेत अन्य लोगों पर उनके समर्थकों बलवंत और अरविंद के साथ मारपीट करने तथा फायरिंग करने का आरोप लगाया गया था। इस घटना में विपिन सिंह के पैर में गोली लगने की बात भी सामने आई थी।

इस दूसरे मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 23 गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने रामदरस, आशीष सिंह, अंकित सिंह, दीपक सिंह और रामजन्म सिंह को पांच-पांच साल के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, प्रत्येक दोषी पर 29 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।

करीब 19 साल पुराने इस मामले में अदालत के फैसले के बाद जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

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