क्रिकेट के मैदान पर मौत का 'छत्ता': उन्नाव में मधुमक्खियों के हमले से वरिष्ठ अंपायर मानिक गुप्ता का निधन, खेल जगत में शोक
उन्नाव/कानपुर: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक क्रिकेट मैच के दौरान मधुमक्खियों के अचानक हमले ने खेल के मैदान को मातम में बदल दिया। इस हमले में कानपुर के अनुभवी और वरिष्ठ क्रिकेट अंपायर मानिक गुप्ता (65) की दर्दनाक मौत हो गई।
कैसे हुआ हादसा?
मिली जानकारी के मुताबिक, उन्नाव के एक स्थानीय मैदान पर क्रिकेट मैच चल रहा था। मानिक गुप्ता अंपायरिंग कर रहे थे, तभी अचानक मधुमक्खियों का एक विशाल झुंड मैदान में घुस आया। खिलाड़ियों और दर्शकों ने भागकर अपनी जान बचाई, लेकिन उम्रदराज होने के कारण मानिक गुप्ता तेजी से नहीं भाग सके और मैदान पर ही गिर पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब 50 से अधिक मधुमक्खियों ने उन्हें घेर लिया और लगभग 10 मिनट तक डंक मारती रहीं।
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अस्पताल दर अस्पताल भटकते रहे परिजन
हादसे के तुरंत बाद पूर्व रणजी खिलाड़ी राहुल सप्रू उन्हें अपनी कार से शुक्लागंज के एक निजी अस्पताल ले गए, जहाँ से उन्हें कानपुर रेफर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि उनकी गंभीर हालत को देखते हुए दो-तीन बड़े अस्पतालों ने उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया। अंततः जब उन्हें कानपुर के हैलट अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
हृदय रोगी थे मानिक गुप्ता
विशेषज्ञों का कहना है कि मधुमक्खी का जहर (Bee Venom) शरीर में एलर्जिक रिएक्शन पैदा करता है। चूंकि मानिक गुप्ता हृदय रोगी थे और बुजुर्ग थे, इसलिए 'मल्टीपल स्टिंग्स' (ज्यादा डंक) के कारण उनके शरीर ने रिस्पॉन्ड करना बंद कर दिया और हार्ट फेलियर की स्थिति बन गई।
30 साल का लंबा करियर
मानिक गुप्ता कानपुर क्रिकेट एसोसिएशन (KCA) के एक सम्मानित सदस्य थे और पिछले 30 वर्षों से अंपायरिंग कर रहे थे। उनके निधन की खबर से कानपुर और उन्नाव के क्रिकेट प्रेमियों में शोक की लहर है। उनके परिवार में चार बेटियां हैं।
[Alert] मधुमक्खियों के हमले से कैसे बचें? (Surviving Tips)
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस घटना के बाद कुछ जरूरी सलाह दी है:
- चेहरा ढकें: मधुमक्खियां सबसे पहले संवेदनशील अंगों जैसे आंख और नाक पर हमला करती हैं। तुरंत चेहरा कवर करें।
- भागें नहीं, छिपें: खुले मैदान में दौड़ने के बजाय किसी बंद कमरे, कार या सुरक्षित घर के अंदर घुस जाएं।
- डंक न दबाएं: डंक लगने पर उसे दबाकर न निकालें, बल्कि किसी कार्ड या नाखून से खुरचकर निकालें।
- इमरजेंसी हेल्प: यदि सांस फूलने लगे या शरीर पर सूजन आए, तो बिना देरी किए अस्पताल पहुंचें।