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) सिद्धार्थनगर में बड़े GST स्कैम का पर्दाफाश: 7 हजार कमाने वाले टीचर को मिला 2 करोड़ का नोटिस, जानें पूरा मामला
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सिद्धार्थनगर में बड़े GST स्कैम का पर्दाफाश: 7 हजार कमाने वाले टीचर को मिला 2 करोड़ का नोटिस, जानें पूरा मामला

📅 21 Feb 2026, 07:15 👁️ 1 व्यूज
सिद्धार्थनगर: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने न केवल एक गरीब परिवार की नींद उड़ा दी है, बल्कि जीएसटी विभाग की कार्यप्रणाली और साइबर सुरक्षा पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में एक प्राइवेट स्कूल के शिक्षक को जीएसटी विभाग ने 1,99,42,313 रुपये (करीब 2 करोड़) का टैक्स जमा करने का नोटिस थमाया है।
कौन है पीड़ित ओम प्रकाश?
पीड़ित की पहचान ओम प्रकाश वर्मा के रूप में हुई है, जो सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज के रहने वाले हैं। ओम प्रकाश एक साधारण प्राइवेट शिक्षक हैं और उनकी मासिक आय मात्र 6 से 7 हजार रुपये है। इतनी कम कमाई में परिवार का भरण-पोषण करने वाले युवक के लिए करोड़ों का यह नोटिस किसी पहाड़ टूटने से कम नहीं है।
कैसे हुआ करोड़ों का 'खेल'?
ओम प्रकाश के अनुसार, उन्हें यह जानकर गहरा धक्का लगा कि उनके नाम और पैन कार्ड (PAN Card) का इस्तेमाल करके दो अलग-अलग व्यापारिक फर्में संचालित की जा रही थीं। जालसाजों ने उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर निम्नलिखित फर्में पंजीकृत कराई थीं:
  1. ओम ट्रेडर्स (Om Traders): यह फर्म नई दिल्ली के पते पर पंजीकृत थी।
  2. वर्मा इंटरप्राइजेज (Verma Enterprises): यह फर्म उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में पंजीकृत दिखाई गई थी।
जांच में यह बात सामने आई कि दिल्ली स्थित 'ओम ट्रेडर्स' के जरिए 11.07 करोड़ रुपये से अधिक का टर्नओवर (लेन-देन) किया गया। इसी लेन-देन पर बकाया टैक्स और पेनल्टी मिलाकर विभाग ने 1.99 करोड़ रुपये की मांग की है।
पीड़ित का पक्ष: "2020 में बनवाया था पैन कार्ड"
ओम प्रकाश वर्मा ने बताया कि उन्होंने साल 2020 में अपना पैन कार्ड बनवाया था। उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर कोई करोड़ों का व्यापार कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फर्म के पंजीकरण में जो मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी इस्तेमाल किए गए हैं, वे उनके नहीं हैं। उन्होंने कभी कोई व्यापारिक पंजीकरण (GST Registration) नहीं कराया और न ही कभी दिल्ली या फर्रुखाबाद में कोई कारोबार किया।
कानूनी कार्रवाई और विभाग का रुख
मामला सामने आने के बाद पीड़ित ने तुरंत डुमरियागंज कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। वहीं, वाणिज्य कर विभाग (GST) के अधिकारियों का कहना है कि यह एक 'आइडेंटिटी थेफ्ट' (Identity Theft) का मामला प्रतीत होता है। विभाग ने पीड़ित को सलाह दी है कि वह अपनी बेगुनाही के सबूतों के साथ डिप्टी कमिश्नर (वाणिज्य कर) के समक्ष अपना पक्ष रखें ताकि फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर नोटिस को निरस्त किया जा सके और असली दोषियों पर शिकंजा कसा जा सके।
सावधानी ही बचाव है
यह मामला उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो अपने आधार और पैन कार्ड जैसे संवेदनशील दस्तावेज किसी भी अनजान व्यक्ति या अनधिकृत पोर्टल पर साझा कर देते हैं। साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, अक्सर केवाईसी (KYC) के नाम पर डेटा चोरी किया जाता है और फिर उसका इस्तेमाल शेल कंपनियाँ (Shell Companies) बनाने में किया जाता है।
निष्कर्ष
सिद्धार्थनगर का यह मामला उत्तर प्रदेश में बढ़ते जीएसटी फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है। फिलहाल ओम प्रकाश वर्मा न्याय की गुहार लगा रहे हैं और पुलिस इस गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है।

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