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यूपी में सियासी भूकंप: अखिलेश का 'मास्टरस्ट्रोक', नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने थामा सपा का दामन, मायावती के किले में बड़ी सेंध!
📅 15 Feb 2026, 17:26
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर आ रही है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक ऐसी चाल चली है जिसने विरोधियों के खेमे में खलबली मचा दी है। बहुजन समाज पार्टी के 'चाणक्य' कहे जाने वाले और पूर्व कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने आज विधिवत रूप से समाजवादी पार्टी की सदस्यता ले ली है।
अखिलेश की मौजूदगी में 'साइकिल' की रफ़्तार
राजधानी लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में आज नजारा देखने लायक था। जैसे ही अखिलेश यादव ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी का झंडा थमाया, कार्यकर्ताओं के जोश से पूरा हॉल गूंज उठा। जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ एक नेता का शामिल होना नहीं है, बल्कि मायावती के कोर वोट बैंक और पश्चिमी यूपी के मुस्लिम समीकरणों पर अखिलेश यादव का सबसे बड़ा प्रहार है।
नसीमुद्दीन के 'तीखे' बाण: "अब सिर्फ सपा ही विकल्प"
सपा में शामिल होते ही नसीमुद्दीन सिद्दीकी के तेवर काफी तल्ख नजर आए। उन्होंने बिना नाम लिए बसपा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा— "आज प्रदेश को खोखला किया जा रहा है और डराने वाली राजनीति हो रही है। ऐसे में अखिलेश यादव ही वो इकलौते नेता हैं जो सबको साथ लेकर चल सकते हैं। मैं यहाँ किसी पद के लिए नहीं, बल्कि नफरत की राजनीति को खत्म करने के लिए आया हूँ।"
क्यों सनसनीखेज है यह फैसला?
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक कद इतना बड़ा है कि उनके एक इशारे पर पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड की दर्जनों सीटों के समीकरण बदल जाते हैं।
मुस्लिम-PDA गठबंधन: नसीमुद्दीन के आने से सपा का मुस्लिम आधार और मजबूत होगा।
संगठनात्मक पकड़: सिद्दीकी को संगठन का माहिर खिलाड़ी माना जाता है, जिसका फायदा चुनाव में सपा को मिलेगा।
विपक्ष को झटका: कांग्रेस और बसपा के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है।
राजनीति के गलियारों में चर्चा है कि अखिलेश यादव अब "Wait and Watch" की नीति छोड़कर "Direct Action" के मूड में हैं। नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे अनुभवी नेता को साथ जोड़कर उन्होंने साफ कर दिया है कि 2027 की जंग के लिए 'साइकिल' पूरी तरह तैयार है।