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​आजमगढ़: जीयनपुर कान्हा गौशाला में अधिकारियों की 'छापेमारी', अव्यवस्था देख बिफरे अफसर; दिए कड़े निर्देश

📅 22 Feb 2026, 15:42 👁️ 1 व्यूज

जीयनपुर, आजमगढ़ : उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में शामिल गौ-वंश संरक्षण योजना की जमीनी हकीकत परखने के लिए सोमवार को प्रशासनिक अमले ने नगर पंचायत जीयनपुर स्थित कान्हा गौशाला का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान गौशाला में व्यवस्थाओं की भारी कमी और अभिलेखों के रखरखाव में लापरवाही सामने आई, जिस पर अधिकारियों ने मौके पर मौजूद कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।

रजिस्टर और स्टाफ पंजिका का अवलोकन 

​निरीक्षण की शुरुआत गौशाला के प्रशासनिक भवन से हुई, जहाँ अधिकारियों ने सबसे पहले गोवंश रजिस्टर और स्टाफ उपस्थिति पंजिका का बारीकी से अवलोकन किया। जांच के दौरान पाया गया कि रजिस्टर में पशुओं की संख्या और उनके स्वास्थ्य का विवरण नियमित रूप से अपडेट नहीं किया जा रहा था। अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कागजी कार्रवाई में पारदर्शिता नहीं बरती गई, तो इसे वित्तीय अनियमितता मानते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।

क्षमता बढ़ाने और आवारा पशुओं के संरक्षण पर जोर

​निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि गौशाला की क्षमता के अनुसार वहां कम पशुओं को रखा गया है। जिलाधिकारी के निर्देशों का हवाला देते हुए निरीक्षण दल ने कहा कि क्षेत्र में लावारिस घूम रहे गौवंशों के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं और आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। ऐसे में गौशाला की क्षमता का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करते हुए सड़कों पर घूम रहे अधिक से अधिक गोवंश को यहाँ संरक्षित किया जाए।

चारा और पानी की व्यवस्था पर सख्त तेवर

​गौशाला के भीतर पशुओं के बाड़े में जाकर अधिकारियों ने उनके खान-पान की गुणवत्ता जांची। मौके पर हरे चारे की उपलब्धता कम पाए जाने पर अधिकारियों ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिया कि:

  • हरा चारा और भूसा: गोवंश के लिए पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक हरे चारे और सूखे भूसे का भंडारण सुनिश्चित हो।
  • पेयजल व्यवस्था: पशुओं के लिए साफ पीने के पानी की हौदियां हमेशा भरी होनी चाहिए।
  • साफ-सफाई: बाड़े में गोबर और गंदगी का जमाव न हो, जिससे पशुओं में बीमारियां न फैलें।

 क्यों जरूरी है गौ-संरक्षण?

​उत्तर प्रदेश में गौ-वंश का संरक्षण केवल एक धार्मिक मुद्दा नहीं बल्कि एक बड़ी सामाजिक और आर्थिक जरूरत बन गया है। लावारिस पशुओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को रात-भर जागकर अपनी फसलों की रखवाली करनी पड़ती है। सरकार द्वारा 'कान्हा गौशाला' जैसी योजनाओं के लिए करोड़ों का बजट आवंटित किया जाता है, लेकिन धरातल पर कर्मचारियों की लापरवाही इस योजना के उद्देश्य को विफल कर देती है।

​जीयनपुर में हुआ यह औचक निरीक्षण शासन की उस मंशा को दर्शाता है कि अब गौ-सेवा के नाम पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थानीय नागरिकों की भी मांग है कि नगर पंचायत प्रशासन को समय-समय पर ऐसी जांच करनी चाहिए ताकि गौशाला केवल कागजों पर न चले।

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