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राजनीति
Azamgarh Ground Report: "साहब! 10 साल से नर्क झेल रहे हैं..." सब्र का बांध टूटा तो सड़क पर उतरे हजारों ग्रामीण, गूंजा नारा— 'रोड नहीं तो वोट नहीं'
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📅 08 Feb 2026, 12:23 PM
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🔥 आजमगढ़ में बड़ा विद्रोह! 🔥 महराजगंज के ग्रामीणों ने प्रशासन को दी खुली चुनौती— "सड़क बनाओ वरना वोट भूल जाओ!" 🚫 10 साल से 'कीचड़ और गड्ढों' में जी रहे दर्जनों गांवों के लोगो
🔥 आजमगढ़ में बड़ा विद्रोह! 🔥 महराजगंज के ग्रामीणों ने प्रशासन को दी खुली चुनौती— "सड़क बनाओ वरना वोट भूल जाओ!" 🚫 10 साल से 'कीचड़ और गड्ढों' में जी रहे दर्जनों गांवों के लोगो
आजमगढ़ (Azamgarh)। लखनऊ और दिल्ली में बैठे हुक्मरान भले ही 'गड्ढा मुक्त सड़कों' और विकास के बड़े-बड़े दावे करते हों, लेकिन आज भी ग्रामीण भारत की एक बड़ी आबादी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। इसका जीता-जागता सबूत रविवार को आजमगढ़ के महराजगंज विकासखंड (Maharajganj Block) में देखने को मिला। यहाँ पिछले एक दशक (10 साल) से जर्जर सड़क का दंश झेल रहे ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया।
सैकड़ों की संख्या में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने सड़क पर उतरकर "रोड नहीं तो वोट नहीं" (Road Nahi To Vote Nahi) का संकल्प लिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इन दर्जनों गांवों की 'लाइफलाइन' बनी मुसीबत
ग्रामीणों का गुस्सा उस संपर्क मार्ग को लेकर है जो झोटीपुर से पासीपुर (शारदा सहायक नहर के किनारे) और नेवादा पेट्रोल पंप से होकर गुजरता है। यह सड़क सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि दर्जनों गांवों की लाइफलाइन है।
यह मार्ग बृजमनी, सोनपरा, कबेलपुर, कुम्हवट, लहरपार, यूसुफपुर, सौंसारे समेत कई अन्य गांवों को मुख्य धारा से जोड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि:
- सड़क पिछले 10 वर्षों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।
- गड्ढे इतने गहरे हैं कि सड़क और गड्ढों में फर्क करना मुश्किल है।
- बरसात में यह तालाब बन जाती है और सूखे में धूल का गुबार।
- हालात इतने बदतर हैं कि इस पर पैदल चलना भी किसी जोखिम से कम नहीं है। गर्भवती महिलाओं और मरीजों को अस्पताल ले जाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
आजमगढ़ (Azamgarh)। लखनऊ और दिल्ली में बैठे हुक्मरान भले ही 'गड्ढा मुक्त सड़कों' और विकास के बड़े-बड़े दावे करते हों, लेकिन आज भी ग्रामीण भारत की एक बड़ी आबादी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। इसका जीता-जागता सबूत रविवार को आजमगढ़ के महराजगंज विकासखंड (Maharajganj Block) में देखने को मिला। यहाँ पिछले एक दशक (10 साल) से जर्जर सड़क का दंश झेल रहे ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया।
सैकड़ों की संख्या में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने सड़क पर उतरकर "रोड नहीं तो वोट नहीं" (Road Nahi To Vote Nahi) का संकल्प लिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इन दर्जनों गांवों की 'लाइफलाइन' बनी मुसीबत
ग्रामीणों का गुस्सा उस संपर्क मार्ग को लेकर है जो झोटीपुर से पासीपुर (शारदा सहायक नहर के किनारे) और नेवादा पेट्रोल पंप से होकर गुजरता है। यह सड़क सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि दर्जनों गांवों की लाइफलाइन है।
यह मार्ग बृजमनी, सोनपरा, कबेलपुर, कुम्हवट, लहरपार, यूसुफपुर, सौंसारे समेत कई अन्य गांवों को मुख्य धारा से जोड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि:
- सड़क पिछले 10 वर्षों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।
- गड्ढे इतने गहरे हैं कि सड़क और गड्ढों में फर्क करना मुश्किल है।
- बरसात में यह तालाब बन जाती है और सूखे में धूल का गुबार।
- हालात इतने बदतर हैं कि इस पर पैदल चलना भी किसी जोखिम से कम नहीं है। गर्भवती महिलाओं और मरीजों को अस्पताल ले जाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।