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​आजमगढ़: जिला जेल में बंद हत्यारोपित बंदी की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप; जिला अस्पताल में भारी हंगामा

📅 22 Feb 2026, 18:52 👁️ 1 व्यूज

आजमगढ़ : उत्तर प्रदेश की आजमगढ़ जिला जेल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। रविवार देर शाम जेल की सलाखों के पीछे बंद एक 36 वर्षीय विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मौत की खबर जैसे ही जेल की दीवारों से बाहर निकली, पूरे जिले के प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया। मृतक के परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिला अस्पताल में जमकर हंगामा किया और मारपीट कर हत्या करने का दावा किया है।

कौन था मृतक उग्रसेन सिंह?

​मृतक बंदी की पहचान मुबारकपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पुरुषोत्तमपुर निवासी उग्रसेन सिंह (पुत्र स्व. राम वृक्ष सिंह) के रूप में हुई है। उग्रसेन पिछले कुछ समय से हत्या के एक मामले में जिला जेल में निरुद्ध था। जेल सूत्रों के अनुसार, उग्रसेन का व्यवहार अन्य कैदियों के साथ सामान्य था और रविवार सुबह तक वह पूरी तरह स्वस्थ दिख रहा था।

कैसे बिगड़ी तबीयत? जेल प्रशासन की थ्योरी

​जेल प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, रविवार सुबह और दोपहर तक उग्रसेन ने अपनी बैरक में सामान्य रूप से भोजन किया और दैनिक कार्यों में हिस्सा लिया। लेकिन शाम ढलते ही अचानक उसने घबराहट की शिकायत की। जेल के स्वास्थ्य कर्मियों ने जब उसकी जांच की, तो उसका ब्लड प्रेशर (BP) खतरनाक स्तर तक नीचे गिर चुका था। आनन-फानन में उसे जेल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन देर शाम उसने दम तोड़ दिया।

परिजनों का आरोप: "यह स्वाभाविक मौत नहीं, हत्या है"

​उग्रसेन की मौत की खबर मिलते ही उसके गांव पुरुषोत्तमपुर से सैकड़ों की संख्या में लोग और परिजन जिला अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और गुस्से का माहौल बन गया। परिजनों ने जेल प्रशासन की थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए आरोप लगाया कि उग्रसेन को जेल के अंदर बेरहमी से पीटा गया है। मृतक के भाई और अन्य रिश्तेदारों ने मांग की है कि दोषी जेल कर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: अस्पताल बना छावनी

​हंगामे की सूचना मिलते ही नगर कोतवाली सहित कई थानों की फोर्स और पीएसी के जवानों को जिला अस्पताल में तैनात कर दिया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया, लेकिन लोग न्यायिक जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया।

विस्तृत विश्लेषण: जेल मैन्युअल और कानूनी प्रावधान

​भारत में जेल के भीतर किसी भी बंदी की मौत (Custodial Death) को बेहद गंभीरता से लिया जाता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, ऐसी हर घटना की सूचना 24 घंटे के भीतर आयोग को देनी होती है।

  1. न्यायिक जांच: जेल में मौत के मामले में मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य होती है।
  2. वीडियो पोस्टमार्टम: उग्रसेन के शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल द्वारा किया जाएगा और इसकी पूरी वीडियोग्राफी कराई जाएगी ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
  3. लापरवाही का सवाल: यदि उग्रसेन सुबह तक ठीक था, तो अचानक उसका बीपी इतना कम कैसे हो गया? क्या उसे समय पर सही इलाज मिला? ये ऐसे सवाल हैं जो जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।

निष्कर्ष और आगे की राह

​फिलहाल पुलिस ने शव को पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। जिले के आला अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा होगा। यदि रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की चोट या आंतरिक चोट के निशान मिलते हैं, तो संबंधित जेल कर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होना तय है। 'द पब्लिक एक्सप्रेस' की टीम इस मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और पल-पल की अपडेट आप तक पहुँचाती रहेगी।

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