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आजमगढ़: जिला अस्पताल के ब्लड सेंटर में तांडव, डॉक्टर से अभद्रता और धमकी देने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार; CCTV से हुई पहचान

📅 23 Feb 2026, 13:57 👁️ 1 व्यूज

आजमगढ़ (द पब्लिक एक्सप्रेस): जनपद के मंडलीय जिला चिकित्सालय में सरकारी कार्य में बाधा डालने और चिकित्साधिकारी के साथ दुर्व्यवहार करने वालों के खिलाफ पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। ब्लड सेंटर के प्रभारी अधिकारी के साथ उनके कक्ष में घुसकर अभद्रता और जान से मारने की धमकी देने के मामले में कोतवाली पुलिस ने सोमवार को तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया। यह पूरी घटना अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपियों पर शिकंजा कसा है।

क्या है पूरा विवाद? (घटना का विवरण)

​जानकारी के अनुसार, घटना शनिवार (21 फरवरी 2026) सुबह करीब 9:00 बजे की है। मंडलीय जिला चिकित्सालय आजमगढ़ के ब्लड सेंटर में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब तीन व्यक्ति जबरन प्रभारी अधिकारी श्री अनिल कुमार मौर्य के कक्ष में दाखिल हो गए। आरोप है कि इन व्यक्तियों ने किसी बात को लेकर डॉक्टर के साथ तीखी नोकझोंक शुरू कर दी और देखते ही देखते अभद्रता पर उतारू हो गए। बात सिर्फ बहस तक सीमित नहीं रही, बल्कि आरोपियों ने प्रभारी अधिकारी को गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकी भी दी।

CCTV फुटेज ने खोली पोल

​डॉक्टर अनिल कुमार मौर्य की शिकायत पर जब पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, तो ब्लड सेंटर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में साफ तौर पर आरोपियों की गुंडागर्दी और अभद्रता दिखाई दे रही थी। साक्ष्यों के आधार पर थाना कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।

अस्पताल परिसर से ही हुई गिरफ्तारी

​वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के सख्त निर्देशों के बाद, कोतवाली पुलिस की टीम सक्रिय हुई। उप-निरीक्षक अखिलेश नारायण सिंह ने अपनी टीम के साथ सोमवार दोपहर करीब 3:45 बजे सदर अस्पताल परिसर के पास से ही तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:

  1. अंगद यादव (निवासी पगरा, कोतवाली)
  2. वीरा यादव (निवासी कोढवा, जहानागंज)
  3. यशवन्त सिंह (निवासी उकरौड़ा, कोतवाली)

सरकारी काम में बाधा डालने पर होगी सख्त कार्रवाई

​पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मु0अ0सं0 67/26 के तहत धारा 115(2), 351(3), और 333 BNS के अंतर्गत कार्रवाई की है। आजमगढ़ पुलिस ने इस मामले के जरिए आमजन को कड़ा संदेश दिया है कि किसी भी सरकारी संस्थान में घुसकर हंगामा करना, सरकारी कार्य में बाधा डालना या लोक सेवकों (Government Servants) के साथ दुर्व्यवहार करना भारी पड़ सकता है। ऐसी हरकतों पर पुलिस प्रशासन 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाएगा।

​अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर जहाँ डॉक्टर लोगों की जान बचाने के लिए दिन-रात काम करते हैं, वहाँ इस तरह की अराजकता शर्मनाक है। ब्लड सेंटर जैसी जगह पर अनुशासन और शांति अनिवार्य है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे केंद्रों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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