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प्रयागराज: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की बढ़ी मुश्किलें, पॉक्सो कोर्ट ने यौन शोषण मामले में FIR दर्ज करने का दिया आदेश

📅 22 Feb 2026, 07:26 👁️ 1 व्यूज

प्रयागराज। धर्मनगरी प्रयागराज से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके प्रिय शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का आदेश जारी हुआ है। प्रयागराज की विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने नाबालिग बटुकों (शिष्यों) के यौन शोषण के आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए झूंसी थाना पुलिस को तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।

​क्या है पूरा मामला?

​यह पूरा विवाद शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा अदालत में दाखिल की गई एक अर्जी के बाद शुरू हुआ। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने आश्रम में रहने वाले नाबालिग बच्चों का 'गुरु सेवा' के नाम पर शारीरिक शोषण किया है।

​अर्जी में दावा किया गया है कि माघ मेले के दौरान लगे शिविर और आश्रम में इन नाबालिग बटुकों के साथ अनैतिक कृत्य किए गए। शिकायतकर्ता ने अपनी दलीलों के समर्थन में कुछ वीडियो साक्ष्य और दो पीड़ित नाबालिग बच्चों को भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया था, जिन्होंने अपनी आपबीती सुनाई।

​अदालत का सख्त रुख और पुलिस को निर्देश

​मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत में हुई। अदालत ने पुलिस द्वारा पेश की गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और बच्चों के बयानों का अवलोकन करने के बाद माना कि मामला बेहद गंभीर है। कोर्ट ने झूंसी थाना प्रभारी को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के तहत एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू की जाए।

​अदालत ने स्पष्ट किया कि धार्मिक गरिमा अपनी जगह है, लेकिन कानून से ऊपर कोई नहीं है। यदि किसी नाबालिग के साथ अन्याय हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच अनिवार्य है।

​स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को बताया 'साजिश'

​इस पूरे मामले पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "यह मुझे और मेरी पीठ को बदनाम करने की एक गहरी साजिश है। हम जांच से भागने वाले नहीं हैं। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।" स्वामी जी ने आगे कहा कि वह कानून का सम्मान करते हैं और न्यायालय की प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे। हालांकि, उनके समर्थकों का दावा है कि उनके बढ़ते धार्मिक प्रभाव को रोकने के लिए कुछ विरोधी ताकतें इस तरह के अनैतिक हथकंडे अपना रही हैं।

​आगामी चुनौतियां और कानूनी स्थिति

​पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज होने का मतलब है कि अब पुलिस को पीड़ित बच्चों के 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराने होंगे। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो गिरफ्तारी की तलवार भी लटक सकती है। कानूनी जानकारों का कहना है कि पॉक्सो एक्ट में जमानत मिलना काफी कठिन होता है, ऐसे में आने वाले दिन शंकराचार्य के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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