गूगल अर्थ का एआई फीचर विवादों में: फर्जी सैटेलाइट तस्वीरों के खतरे के चलते गूगल को लेना पड़ा वापस
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📅 03 Aug 2026, 08:21 AM
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📍 उत्तर प्रदेश
गूगल अर्थ के नए एआई इमेज जनरेशन फीचर को लेकर खड़े हुए विवाद और फर्जी सैटेलाइट तस्वीरों के खतरे के पूरी जानकारी पढ़ें। जानें क्यों गूगल को लेना पड़ा बड़ा फैसला।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच Google का एक नया फीचर विवादों में आ गया है। कंपनी ने हाल ही में Google Earth के लिए एक AI आधारित इमेज जनरेशन फीचर पेश किया था, लेकिन इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर विशेषज्ञों की आपत्तियों के बाद इसे अस्थायी रूप से वापस लेना पड़ा।
यह फीचर उपयोगकर्ताओं को सैटेलाइट और 3D मैप डेटा के आधार पर टेक्स्ट लिखकर नई तस्वीरें तैयार करने की सुविधा देता था। इसका उद्देश्य शहरी नियोजन, शिक्षा, ऐतिहासिक घटनाओं की प्रस्तुति और रचनात्मक कार्यों में मदद करना था। हालांकि, लॉन्च के तुरंत बाद साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि इस तकनीक का इस्तेमाल फर्जी सैटेलाइट तस्वीरें बनाकर गलत सूचनाएं फैलाने के लिए किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति किसी संवेदनशील इलाके में काल्पनिक सैन्य गतिविधि, विस्फोट, प्राकृतिक आपदा या अन्य घटनाओं की वास्तविक जैसी तस्वीरें तैयार कर सोशल मीडिया पर साझा करता है, तो आम लोगों के लिए असली और AI से बनाई गई तस्वीरों में अंतर करना बेहद मुश्किल हो सकता है। इससे अफवाहें फैलने और सुरक्षा संबंधी भ्रम पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है।
Google Earth को दुनिया भर में पत्रकार, शोधकर्ता, मानवीय सहायता संगठन और सुरक्षा एजेंसियां विश्वसनीय भौगोलिक जानकारी के लिए इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में इसी प्लेटफॉर्म पर AI से तैयार की गई अत्यधिक वास्तविक दिखने वाली तस्वीरों ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी।
विवाद बढ़ने के बाद Google ने कहा कि वह इस फीचर को फिलहाल रोक रहा है और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने के बाद ही इसे दोबारा उपलब्ध कराने पर विचार करेगा। कंपनी का कहना है कि उसका उद्देश्य AI तकनीक का जिम्मेदारी के साथ उपयोग सुनिश्चित करना है, ताकि इसका गलत इस्तेमाल न हो सके।
AI तकनीक लगातार नई संभावनाएं खोल रही है, लेकिन यह मामला बताता है कि नवाचार के साथ-साथ सुरक्षा और विश्वसनीयता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में AI आधारित टूल्स के लिए और सख्त नियम तथा बेहतर सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिल सकती है।