Azamgarh News: जीयनपुर के पूर्व चेयरमैन हरिशंकर यादव और भाई बरी, जानें आखिर अदालत में कैसे बदल गई पूरी कहानी?
"आजमगढ़ की अदालत ने जीयनपुर के पूर्व चेयरमैन हरिशंकर यादव को गंभीर आरोपों से बरी कर दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मामले को निस्तारित किया। जानिए क्या
"आजमगढ़ की अदालत ने जीयनपुर के पूर्व चेयरमैन हरिशंकर यादव को गंभीर आरोपों से बरी कर दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मामले को निस्तारित किया। जानिए क्या
आजमगढ़। नगर पंचायत जीयनपुर के पूर्व चेयरमैन हरिशंकर यादव और उनके भाई कृपाशंकर यादव के खिलाफ चल रहा विवाद आखिरकार कानूनी रूप से समाप्त हो गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने पुलिस द्वारा दाखिल अंतिम रिपोर्ट (Final Report) को स्वीकार करते हुए मुकदमे को निस्तारित कर दिया है।
क्या था मामला?
मामला अपराध संख्या 632/2025 के तहत धारा 64 और 123 BNS (भारतीय न्याय संहिता) के अंतर्गत थाना कोतवाली में दर्ज किया गया था। इसमें वादिनी (पीड़िता) ने शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले ने उस समय काफी राजनीतिक तूल पकड़ा था।
अदालत में बदला कहानी का रुख
सुनवाई के दौरान मामले में उस समय नया मोड़ आया जब वादिनी ने अदालत के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
- वह अब इस मुकदमे को आगे नहीं लड़ना चाहती हैं।
- पूरा विवाद असल में ₹1 लाख के लेनदेन को लेकर था, जो उन्हें प्रशासनिक सहयोग से वापस मिल चुके हैं।
- उन्होंने अपनी स्वतंत्र मर्जी से शपथ-पत्र दाखिल कर पुलिस की जांच रिपोर्ट पर अपनी सहमति जताई।
न्यायालय का आदेश
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सत्यवीर सिंह ने 17 फरवरी 2026 को दिए अपने आदेश में कहा:
"विवेचक द्वारा नियमानुसार विवेचना की गई है और इसमें कोई विधिक या तात्विक त्रुटि नहीं पाई गई है। वादिनी ने भी अंतिम रिपोर्ट पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की है। अतः पुलिस द्वारा प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट स्वीकार करने योग्य है।"
इस आदेश के साथ ही हरिशंकर यादव और उनके सहयोगियों पर लगे सभी आरोप खारिज हो गए हैं और उन्हें कानूनी रूप से दोषमुक्त कर दिया गया है।
सियासी गलियारों में चर्चा
अदालत के इस फैसले के बाद हरिशंकर यादव के समर्थकों में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मामला उनकी राजनीतिक छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से प्रेरित था। फैसले के बाद पूर्व चेयरमैन ने इसे "सत्य की जीत" बताया और कहा कि वे जनसेवा के कार्यों में जुटे रहेंगे।
आजमगढ़। नगर पंचायत जीयनपुर के पूर्व चेयरमैन हरिशंकर यादव और उनके भाई कृपाशंकर यादव के खिलाफ चल रहा विवाद आखिरकार कानूनी रूप से समाप्त हो गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने पुलिस द्वारा दाखिल अंतिम रिपोर्ट (Final Report) को स्वीकार करते हुए मुकदमे को निस्तारित कर दिया है।
क्या था मामला?
मामला अपराध संख्या 632/2025 के तहत धारा 64 और 123 BNS (भारतीय न्याय संहिता) के अंतर्गत थाना कोतवाली में दर्ज किया गया था। इसमें वादिनी (पीड़िता) ने शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले ने उस समय काफी राजनीतिक तूल पकड़ा था।
अदालत में बदला कहानी का रुख
सुनवाई के दौरान मामले में उस समय नया मोड़ आया जब वादिनी ने अदालत के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
- वह अब इस मुकदमे को आगे नहीं लड़ना चाहती हैं।
- पूरा विवाद असल में ₹1 लाख के लेनदेन को लेकर था, जो उन्हें प्रशासनिक सहयोग से वापस मिल चुके हैं।
- उन्होंने अपनी स्वतंत्र मर्जी से शपथ-पत्र दाखिल कर पुलिस की जांच रिपोर्ट पर अपनी सहमति जताई।
न्यायालय का आदेश
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सत्यवीर सिंह ने 17 फरवरी 2026 को दिए अपने आदेश में कहा:
"विवेचक द्वारा नियमानुसार विवेचना की गई है और इसमें कोई विधिक या तात्विक त्रुटि नहीं पाई गई है। वादिनी ने भी अंतिम रिपोर्ट पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की है। अतः पुलिस द्वारा प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट स्वीकार करने योग्य है।"
इस आदेश के साथ ही हरिशंकर यादव और उनके सहयोगियों पर लगे सभी आरोप खारिज हो गए हैं और उन्हें कानूनी रूप से दोषमुक्त कर दिया गया है।
सियासी गलियारों में चर्चा
अदालत के इस फैसले के बाद हरिशंकर यादव के समर्थकों में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मामला उनकी राजनीतिक छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से प्रेरित था। फैसले के बाद पूर्व चेयरमैन ने इसे "सत्य की जीत" बताया और कहा कि वे जनसेवा के कार्यों में जुटे रहेंगे।